#शक्ति_की_भक्ति_है_और_एकता_में_शक्ति_है।
नांदेड़ के एक गुरुद्वारा में सैकड़ों कोरोनावायरस पोजिटिव मरीज पकड़े जाते हैं किसी मीडिया हाउस की इतनी औकात नहीं होती कि उनके खिलाफ दो लफ्ज़ बोल दें। सभी चैनल उनको श्रद्धालू कहकर संबोधित करते हैं जबकि अगर कहीं मस्जिद में एक भी आदमी पकड़ा जाता है तो मीडिया नंगा होकर नाचती है।
पटियाला में पुलिस वालों का हाथ काट दिया जाता है मीडिया में किसी की औकात नहीं होती कि ताल ठोक सके उधर एमपी में एक बुरखे वाली औरत स्कूटी में अपने रिश्तेदार के यहां जा रही होती है पुलिस रोकती है बहस होती है और वह औरत आगे जाकर जमीन में थूक देती है इस खबर पर रजत शर्मा जैसा पत्रकार एक घंटे का प्रोग्राम करता है।
आखिर कारण का है कि दो प्रतिशत आबादी वाले सिख समुदाय के खिलाफ बोलने से मीडिया डरती है और चौदह प्रतिशत आबादी वाले समुदाय को फुटबाल समझती है।
इसका कारण है सिखों की एकता। वह दो प्रतिशत यानी लगभग ढाई करोड़ हैं और सब एक हैं और यहां पचीस करोड़ लोग बहत्तर जगह बंटे हुए हैं इसलिए हर जगह बेइज्जत हो रहे हैं।
और
मेरा पोस्ट से किसी धर्म को नीचा दिखाना नही हे,बस एक धर्म के प्रति भेदभाव को दिखाना हे😑
नांदेड़ के एक गुरुद्वारा में सैकड़ों कोरोनावायरस पोजिटिव मरीज पकड़े जाते हैं किसी मीडिया हाउस की इतनी औकात नहीं होती कि उनके खिलाफ दो लफ्ज़ बोल दें। सभी चैनल उनको श्रद्धालू कहकर संबोधित करते हैं जबकि अगर कहीं मस्जिद में एक भी आदमी पकड़ा जाता है तो मीडिया नंगा होकर नाचती है।
पटियाला में पुलिस वालों का हाथ काट दिया जाता है मीडिया में किसी की औकात नहीं होती कि ताल ठोक सके उधर एमपी में एक बुरखे वाली औरत स्कूटी में अपने रिश्तेदार के यहां जा रही होती है पुलिस रोकती है बहस होती है और वह औरत आगे जाकर जमीन में थूक देती है इस खबर पर रजत शर्मा जैसा पत्रकार एक घंटे का प्रोग्राम करता है।
आखिर कारण का है कि दो प्रतिशत आबादी वाले सिख समुदाय के खिलाफ बोलने से मीडिया डरती है और चौदह प्रतिशत आबादी वाले समुदाय को फुटबाल समझती है।
इसका कारण है सिखों की एकता। वह दो प्रतिशत यानी लगभग ढाई करोड़ हैं और सब एक हैं और यहां पचीस करोड़ लोग बहत्तर जगह बंटे हुए हैं इसलिए हर जगह बेइज्जत हो रहे हैं।
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मेरा पोस्ट से किसी धर्म को नीचा दिखाना नही हे,बस एक धर्म के प्रति भेदभाव को दिखाना हे😑

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