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Showing posts from May 31, 2020

राजनीतिक आकाओं के दम पर कोरोना के इलाज से इनकार नहीं कर सकते प्राइवेट अस्पताल : केजरीवाल

नई दिल्ली। लाइव हिन्दुस्तान टीम, Last Modified: Sat, Jun 06 2020. 13:24 IST     दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कोरोना के इलाज में आनाकानी कर रहे प्राइवेट अस्पतालों पर जमकर हमला बोला। सीएम केजरीवाल ने कहा कि इस संकट काल में भी कुछ हॉस्पिटल बेड्स की ब्लैक मार्केटिंग कर रहे हैं। मैं उनको चेतावनी देना चाहता हूं ऐसे हॉस्पिटल को कतई बख्शा नहीं जाएगा। अस्पताल इलाज करवाने के लिए बनवाए गए हैं, पैसे कमाने के लिए नहीं।  उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर बने सभी अस्पतालों को कोरोना के मरीजों का इलाज करना ही होगा, इससे इनकार करने वाले अस्पतालों के खिलाफ सरकार सख्त से सख्त कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इन अस्पतालों के मालिकों की सभी बड़ी पार्टियों में अच्छी पहुंच है, इसलिए ये अस्पताल अपने राजनीतिक आकाओं के दम पर कोरोना के मरीजों का इलाज करने से बचना चाह रहे हैं। मैं सभी से साफ कहना चाहता हूं कि ऐसे किसी भी अस्पताल को बिल्कुल भी बख्शा नहीं जाएगा।  केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली कोरोना ऐप पर बेड उपलब्ध होने की सूचना देने क...

Baitul muqaddas Masjid

Yah Masjide Aksa hai yeah Masjid King Solomon ke time per Banai gai ise Baitul muqaddas Kahate Hain Islam se pahle yah Islam ke Kuchh Samay Tak Musalman ya isai yahodia Jo Bhi The idhar rukh pe namaj padhte the

*शउव्वाल के महीने में निकाह मुस्तहब है*

*शउव्वाल के महीने में निकाह मुस्तहब है*  उम्मुल मोमिनीन सय्यदना आएशा सिद्दीका रज़िअल्लाह अन्हा बयान फ़रमाती हैं : रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम और मेरी शादी शउव्वाल के महीने में हुई, और रुखसती भी शउव्वाल के महीने में हुई तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की कौन सी बीवी मेरे से ज़्यादा उनके करीब थीं ??  |[ صحیح مسلم : ١٤۲٣ ]| रावी कहते हैं कि सैयदना आयशा रज़िअल्लाहो अन्हा पसंद फ़रमाती थीं कि लड़कियों की रुखसती शउव्वाल के महीने में की जाये,  इमाम नव्वी रहमतुल्ला अलैह फरमाते हैं : " यह हदीस शउव्वाल के महीने में निकाह और रुख्सती के इस्तेहबाब पर दलालत करती है, शाफ़इ फ़ोक़हा ने यही बात फरमाइ है और उनकी दलील भी यह हदीस है, और सय्यदना आयशा रज़िअल्लाहो अन्हा का यह बात करने का मकसद जाहिलियत की सोच का रद था, आजकल भी आम लोग शउव्वाल के महीने में शादी करना और बीवियों के पास जाना मकरूह समझते हैँ, यह बात बातिल (गलत) है जिसकी कोई बुनियाद नहीं, और यह जाहिलियत की आदत में से है, ज़माने जाहिलियत में लोग शउव्वाल में शादी करने को मनहूस ख्याल करते थे |[ شرح صحيح مسلم : ٢٠٩/٩ ]| ┄┄┅┅✪❂✵🔵✵❂✪┅┅┄┄ ?...