🎹 *आसान तौहीद* 🎹
*मनुष्य का जन्म और*
*कलमा-ए-तौहीद का मक़सद*
*सवाल 72:* कलमा-ए-तौहीद जन्नत में दाख़िल होने का ज़रिया है, इसकी दलील क्या है?
*जवाब :* अल्लाह तआला फ़रमाता है:
*"यक़ीनन उन्होंने कुफ़्र किया जिन्होंने कहा कि " अल्लाह वही मसीह इब्ने मरयम ही है।" हालाँकि मसीह ने कहा था, "ऐ बनी इस्राइल, अल्लाह की बन्दगी करो, जो मेरा भी रब है, और तुम्हारा भी रब है। जो कोई अल्लाह का शरीक ठहराएगा, उसपर तो अल्लाह ने जन्नत हराम कर दी है, और उसका ठिकाना आग है; ज़ालिमों का कोई मददगार नही।"*(अल माइदा: 72)
*सवाल 73 :* कलमा-ए-तौहीद से आख़िरत मे माफी नसीब होगी, इसकी दलील क्या है?
*जवाब :* रसूलुल्लाह सल्ल० फ़रमाते है: *"जो शख़्स इस हाल में मरे कि वो " ला इलाहा इल्लल्लाह" का इल्म रखता हो तो वह जन्नत में दाख़िल होगा।"*
( सही मुस्लीम : 26 )
*सवाल 74 :* कलमा-ए-तौहीद का वज़न क्या है?
*जवाब :* तराजू के एक पलड़े में अगर सातों आसमान, ज़मीन और अल्लाह को छोड़कर सभी मख़लूक हो और दूसरे पलड़े में सिर्फ कलमा-ए-तौहीद हो तो कलमा-ए-तौहीद का पलड़ा ज़्यादा वजनदार होगा।
*सवाल 75 :* क्या कोई भी अमल शिर्क के साथ फ़ायदा देता है?
*जवाब :* अल्लाह तआला फ़रमाता है:
*"और अगर उन्होंने शिर्क किया तो उनके आमाल जो उन्होंने किए सब बरबाद हो जाएँगे।"*(अल अनआमः88)
*सवाल 76:* क्या अमल की कुबुलियत के लिए तौहीद बुनियादी शर्त है?
*जवाब :* हाँ! अमल की कुबुलियत के लिए तौहीद बुनियादी शर्त है। अल्लाह तआला फ़रमाता है: *"कह दो: मैं तो महज़ तुम्हीं जैसा एक इन्सान हुँ। मेरी तरफ़ वही की जाती है कि तुम्हारा माबूद बस अकेला माबूद है। पस जो कोई अपने रब की मुलाकात की उम्मीद रखता हो उसे चाहिए कि नेक आमाल इख़्तियार करे, और अपने रब की बन्दगी में किसी को शरीक न करे।"* ( अल-कहफ़ः 110 )

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