दुनिया फ़तह करने का इरादा रखने वाला सुल्तान अलाउद्दीन खिलज़ी कल के दिन 19 जुलाई 1296 को अपने चचा जलालुद्दीन ख़िलजी को गद्दी से हटाकर खुद दिल्ली सल्तनत का बादशाह बना। फ़िल्मी किरदार में ख़िलजी को ये कहते हुए दिखाया गया कि "अल्लाह की बनाई हर नायाब चीज़ पर सिर्फ अलाउद्दीन का हक़ है"। असल ज़िंदगी में ख़िलजी ने ये बात कही भी या नही इसकी कोई जानकारी मौजूद नही।
ख़िलजी पूरा हिंदुस्तान फ़तह करना चाहता था इस सम्राज्य विस्तार में उसके चाचा जलाउद्दीन रुकावट थे सबसे पहले अपने चाचा को हटाकर खुद बादशाह बना और बादशाह बनते ही अलाउद्दीन ने अपने विद्रोहियों को ख़त्म करना शुरू किया उस वक़्त उनके सबसे बड़े विद्रोहियों में दिल्ली के हाजी मौला, गुजरात के नवी मुसलमान, उनके भतीजे अक़्त खां, उनका भांजा मंगू ख़ां, ने भी विद्रोह किया लेकिन अलाउद्दीन ने सारे विद्रोहियों को खत्म कर दिया।
और फिर दिल्ली छोड़ पूरा हिंदुस्तान फ़तह करने निकल पड़ा। पहले अभियान 1298 में राजा कर्णदेव वाघेला को हराकर गुजरात फ़तह किया राजा वाघेला हारने के बाद देवगिरि के राजा रामचन्द्र के यहां शरण ली।
दूसरा अभियान 1299 में सिर्फ ख़िलजी के सेना के घोड़े जब्त कर लेने की वजह से हुआ जैसलमेर के राजा दूदा के सहयोगियों ने अलाउद्दीन सेना के घोड़े जब्त कर लिए थे। नाराज़ खिलज़ी ने जैसलमेर पर हमला कर राजा दूदा और उनके सहयोगियों को खत्म कर जैसलमेर फ़तह कर लिया।
तीसरा अभियान रणथम्भौर के राजा हम्मीरदेव ने ख़िलजी के दुश्मन मंगोल सेनापति मुहम्मद शाह और कहब को अपने यहां शरण दे रखी थी। इसलिए खिलज़ी ने रणथम्भौर पर हमला कर के मंगोलों को भगाया और रणथम्भौर का किला फ़तह कर लिया इसमे ख़िलजी के सेनापति नुसरत खां और राजा हम्मीरदेव मारे गए।
चौथे अभियान 1303 में चित्तोड़ और मेवाड़ पर हमला किया यह किला राजनीतिक नज़रिये से बेहद सुरक्षित था जिसे खिलजी ने राजा रतनसिंह को हराकर जीत लिया। इस हमले को मालिक मोहम्मद जायसी की काल्पनिक कहानी पद्मावती से जोड़कर देखा जाता है जबकि पद्मावती महज़ एक काल्पनिक कहानी थी जो इस घटना के 237 साल बाद लिखी गयी थी इतिहासकार भी इसे सही नही मानते।
इसके बाद 1304 में जालोर के राजा कान्हड़देव, 1305 में मालवा के राजा महलकदेव को हराकर अफ़ग़ानिस्तान से लेकर पूरा उत्तर भारत जीत लिया ।
ख़िलजी ने अगला हमला देवगिरि पर किया। राजा रामचन्द्र को हराकर उन्हें दिल्ली ख़िलजी के सामने पेश किया गया। लेकिन खिलजी ने रामचन्द्र को उनकी रियासत वापस की और उन्हें 1 लाख सोना टका देकर वापस भेज दिया। जिससे खुश होकर रामचन्द्र ने खिलजी के अभियान में मदद की।
इसके बाद 1309 में खिलज़ी की सेनापति मलिक काफ़ूर ने तेलांगना पर हमला किया। वहां के राजा रुद्रदेव ने आत्मसमर्पण कर दिया बदले में मलिक काफ़ूर को ढेर सारा सोना बेशक़ीमती हीरा कोहिनूर दिया। तब इस हीरे का नाम कोहिनूर नही था। यह हीरा जब मलिक काफ़ूर ने खिलज़ी को भेंट किया था।
इस तरह खिलज़ी ने इतने कम वक्त में दछिड़ के कुछ हिस्से छोड़कर भारत के ज़्यादातर हिस्से पर खिलजियों का परचम बुलन्द कर दिया था। ख़िलजी अपने जिंदगी में कभी कोई जंग नही हारा।

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