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*_❀कुरआन मजीद की इनसाइक्लोपीडिया❀_*
भाग-447 तारीख़:28/08/2020
*★☆★☆ईमान यानी विश्वास-298★★☆★*
*जकात कहाँ ख़र्च की जाए ?*
कुरआन.ने ज़कात को आठ प्रकार के लोगों में खर्च करने का हुक्म दिया है
*_सदके तो वास्तव में मुहताजों और निर्धनों के लिए हैं। और उन कर्मचारियों के लिए जो ज़कात इकट्ठा करने पर लगे हों । और उनके लिए जिनके दिल परचाए और आकृष्ट किए जा रहे हों ! और गुलामों को आजाद कराने के लिए और क़र्ज़दारों की सहायता के लिए, और अल्लाह के मार्ग में खर्च करने के लिए और यात्रियों की सहायता के लिए, यह अल्लाह का ठहराया हुआ हुक्म है अल्लाह जाननेवाला और तत्त्वदर्शी है !_* (सूरा-9, अत-तौबा, आयत-60)
_जकात वास्तव में इस्लामी समाज में आर्थिक असमानता मिटाने का एक ऐसा साधन है जिसका उदाहरण किसी और धर्म या व्यवस्था में नहीं पाया जाता। इतिहास के पन्नों में मदीना राज्य की जो घटनाएँ सुरक्षित हैं, उनमें से एक यह भी है कि ज़कात देनेवाले बाज़ारों में धन हाथ में लेकर घूमते फिरते थे, परन्तु कोई लेनेवाला नहीं मिलता था, क्योंकि ज़कात का एक सरकारी प्रबन्ध था जहाँ लोग अपने ज़ाहिरी माल की ज़कात बैतुल माल' में जमा करते थे, या स्वयं सरकार उनसे वुसूल करती थी (जाहिरी माल में जानवर, व्यापार, खेत की पैदावार आदि आते हैं।) और फिर बैतुल-माल से निर्धनों और मोहताजों को बाँटी जाती थी ! परन्तु सोने-चाँदी की ज़कात मुसलमान स्वयं बाँटते थे, जिसको लेना वाले नहीं मिलते थे। इस प्रकार जकात के सिद्धान्त ने निर्धनता को सदैव के लिए विदा कर दिया !_
_फिर ज़कात मनुष्य की आत्मा की शुद्धि का भी एक साधन है, क्योंकि धन का मोह सदैव आत्मा को घेरे रहता है । अब उससे छुटकारे का एकमात्र साधन ज़कात ही है, क्योंकि हर मुसलमान को ढाई प्रतिशत जकात तो देनी ही है, इसके अतिरिक्त उसे कुछ और भी देना चाहिए ! इस प्रकार ज़कात का सिद्धान्त आत्मा को शुद्ध करने और उसे विकसित करने का विशेष साधन बन जाता है !_
आगे.........
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_निवेदन (गुज़ारिश) इस दर्स में कोई फेर-बदल न करे क्योकि अल्लाह आपके हर हरकत को देख रहा है !_

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