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*_❀कुरआन मजीद की इनसाइक्लोपीडिया❀_*
भाग-450 तारीख़:31/08/2020
*★☆★☆ईमान यानी विश्वास-301★★☆★*
*_★जुआ★_*
जुआ, इसको अरबी में 'मैसिर' कहते हैं। इसका अर्थ है सरलता, अर्थात् धन बिना किसी चीज़ के बदले या बिना परिश्रम के प्राप्त कर लेना। क्योंकि जुए में अचानक धन मिल जाता है। या चला जाता है, इसलिए इसको 'Game of Chance' कहते हैं !
_प्राचीन काल से जुआ (Gambling) खेलने का रिवाज चला आ रहा है। जो इस्लामी शिक्षानुसार किसी के धन को बगैर हक के खाना है ! इसलिए इस्लाम ने इसको सदैव के लिए निषिद्ध कर दिया !_
चूँकि जुए के द्वारा धन खाना लोगों का स्वभाव बन चुका था, इसलिए पहले यह आयत उतरी *_(तुमसे शराब तथा जुए के विषय में पूछते हैं। कहो, "इन दोनों चीज़ों में बड़ा पाप है यद्यपि लोगों के लिए कुछ लाभ भी हैं। परन्तु उनका पाप लाभ से कहीं बढ़कर है !_*
(सूरा-2,अल-बकरा, आयत-219)
इस आयत से पहली बार लोगों को मालूम हुआ कि शराब तथा जुए के अन्दर लाभ कम और हानि अधिक है। और फिर यह आयत उतरी-- *_ऐ ईमानवालो ! ये शराब, जुआ, देव-स्थान तथा पाँसे ये सब गंदे शैतानी काम हैं। अत: तुम इनसे अलग रहो, ताकि सफलता पा सको ! शैतान तो बस यही चाहता है कि शराब और जुए के द्वारा तुम्हारे बीच शत्रुता और द्वेष पैदा कर दे, और तुम्हें अल्लाह की याद से तथा नमाज़ से रोक दे। तो क्या तुम इनसे बाज़ नहीं आओगे ?_* (सूरा-5, अल माईदा आयतें-90,91)
इस आयत के उतरने के बाद सहाबा अज़मईंन ने यही समझा कि अब शराब, जुआ आदि ये सारे काम हराम हैं ! और फिर बाद के विद्वानों ने भी यही समझा ! इस प्रकार मुस्लिम विद्वानों का इसपर मतैक्य हो गया कि अब जुआ सदैव के लिए हराम है। इस लिए जुए में मिले हुए धन का प्रयोग वर्जित है !
आगे.........
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_निवेदन (गुज़ारिश) इस दर्स में कोई फेर-बदल न करे क्योकि अल्लाह आपके हर हरकत को देख रहा है !_

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