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📗अल्लाह और रसूलुल्लाह सल्ल०* *की मुख़ालिफ़त का अंजाम*

 *🕋 आसान तौहीद 🕋* 

 "शिर्क के कुछ मुख़तलिफ़ प्रकार" 

 *अल्लाह और रसूलुल्लाह सल्ल०* *की मुख़ालिफ़त का अंजाम* 




 *सवाल 334:* अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजि० ने अल्लाह और उसके रसूल सल्ल० के फ़रमान के आगे किसी के क़ौल और राय की क्या हैसियत बताई? 

 *जवाब :* अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजि० ने फ़रमाया: *"(तुम्हारा यही हाल रहा) तो करीब है कि तुम पर आसमान से पत्थर बरसें 'मैं तुम्हें रसूलुल्लाह सल्ल० का फ़रमान सुनाता हुँ और तुम अबुबक्र और उमर की बात करते हो।"* ( एअलाम-अल-मौक़ईन ले लिइब्ने क़य्यिमः 168/2 ) 

 *सवाल 335:* इमाम अहमद बिन हम्बल रजि० ने हदीस की सनद और सही इल्म के आगे किसी आदमी की राय को क्यों सज़ा का मुस्तहीक़ ठहराया है? 

 *जवाब :* इमाम अहमद बिन हम्बल रजि० ने उन लोगों के बारेमें जो हदीस की मुख़ालिफ़त करते हैं, फ़रमाया: ऐसे लोग अल्लाह तआला की तरफ़ से आनेवाली मुसीबत या दर्दनाक अज़ाब का सामना करने के लिए तैयार रहें। 

   अल्लाह तआला फ़रमाता है: *"अपने दरमियान रसूल के बुलाने को तुम आपस में एक-दूसरे का बुलाना न समझना, अल्लाह उन लोगों को खूब जानता है जो तुम में ऐसे हैं कि एक-दूसरें की आड़ लेकर चुपके से खिसक जाते हैं: पस उनको जो उसके हुक्म से रुगरदानी कर के मुख़ालिफ़त करते हैं डरना चाहिए कि मबादा उनपर कोई आज़माइश आ पड़े, या उनपर कोई दर्दनाक अज़ाब आ जाए।"* ( अन्-नूरः 63 )

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